History of Jageshwar

(तन्मेमनः शिवसङ्कल्पमस्तु )
श्री नागेशं दारुकावने

परिचय =>

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देवभूमि उत्तराखंड में वैसे तो कई तीर्थस्थल हैं परन्तु उनमे से जागेश्वर ज्योतिर्लिंग अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है | यहाँ भगवान शिव साक्षात निवास करते हैं और यहाँ की सुंदरता अकल्पनीय तथा प्राकृतिक छटा मनोहर तथा रमणीय है |अल्मोड़ा से ३५ कि.मी. की दूरी पर स्थित श्री जागेश्वर धाम उत्तराखंड का सबसे बड़ा मंदिर समूह है , यहाँ की विशेष बात यह हैं | कि जिन देवदार के वृक्षों को माँ पार्वती ने अपने स्तनों के दुग्ध से पाला, उन्हीं देवदार के घनघोर वन के मध्य में स्थित हैं श्री जागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की दाहिनी ओर उत्तरवाहिनी जटागंगा  अविरल बहते हुए धाम के परिसर को प्रफुल्लित कर देती है |

 जागेश्वर धाम =>

श्री जागेश्वर मंदिर परिसर १२५ छोटे – बड़े मंदिरो का समूह है | जिनमे से कुछ प्रमुख हैं  तथा कुछ मंदिर भगवान शिव के विभिन्न रूपों पर आधारित है तो कुछ मंदिर शक्ति को समर्पित हैं | मंदिरो के नाम पर आधारित शिलाखंड पट्टिकाएं मंदिरो के प्रवेश द्वार पर स्थापित हैं | मंदिर कि सरंचना भारतीय नागर शैली पर आधारित है जिसमे मंदिर के ऊंचे शिखर को प्रधानता दी जाती है | मंदिर समूह अपनी वास्तुकला के लिए काफी विख्यात है | यहाँ वास्तु का अनूठा संगम मिलता है यह कैलाशमानसरोवर यात्रा का मार्ग भी है | जागेश्वर धाम का उल्लेख चीनी यात्री हुआन त्सांग ने भी अपनी यात्रा संस्मरण में किया है |यहाँ सभी मंदिरो का निर्माण कत्यूरी राजवंश के शासको ने करवाया था जिन्होंने यहाँ ७ वीं से १४ वीं शताब्दी तक राज किया | तत्पक्षात इन मंदिरो कि देखभाल कि चंद्रवंशी  शासकों ने जिन्होंने १५वीं से १९ वीं शताब्दी तक यहाँ शासन किया |

जागेश्वर ज्योतिर्लिंग का पौराणिक महत्व =>

ज्योतिर्लिंग का वर्णन स्कन्द पुराण के मानस खंड तथा शिव पुराण में किया गया है | “नागेशं दारुका वन ” यह  स्पष्ट करता है कि अष्टम ज्योतिर्लिंग नागेश्वर दारू (देवदार) के वने में स्थित है जो कि पुरे विश्व  में यही पाया जाता है | देवदार का वन इस मंदिर के अभितः व्याप्त है जागेश्वर  धाम को नागेश्वर ,  हाटकेश्वर जागनाथ आदि नामों से भी जाना जाता है | दंतकथाओं  के अनुसार जब भगवान शिव ने अपने ससुर दक्ष प्रजापति का वध कर दिया तब वे अपने शरीर  पर पत्नी सती के भस्म को अलंकरण  करने के लिए ध्यान हेतु यहाँ समाधिस्थ हुए | कथाओ के अनुसार यहाँ निवास करने वाले ऋषियों कि पत्नियां शिव  के रूप से मोहित हो गई थी|  इसके कारणस्वरुप  ऋषिगणों ने क्रोधित होकर भगवान शिव को लिङ्ग विच्छेद का श्राप दे दिया | इस कारण पृथ्वी पर अंधकार  छा गया |  पृथ्वी  इस वेग को सहन न कर पाई पृथ्वी ने विष्णु का ध्यान किया तत्पक्षात भगवान नारायण ने इसे १२ भागों में विभाजित  किया वही ज्योतिर्लिंग रूप में आज भी पूजे जाते हैं |  एक और दंतकथा के अनुसार  भगवान राम के पुत्र लव कुश ने यहाँ यज्ञ किया था जिसके लिए उन्होंने सभी देवताओ को आमंत्रित किया था | 

जागेश्वर धाम के मुख्य मंदिर  =>

जागेश्वर मंदिर परिसर का सबसे प्राचीन व विशालतम मंदिर है  महामृतुंजय महादेव मंदिर |परिसर में प्रवेश करते ही आप इसे देख सकते हैं  

तदुपरांत प्रमुख मंदिर श्री ज्योतिर्लिंग जागेश्वर है जो विशालकाय पत्थरों से निर्मित है यहाँ के बाहरी  दीवारों पर अनेक देवी-देवताओं कि मूर्तियाँ उत्कीर्ण हैं जो बहुत ही आंनद प्रदान करती हैं | मंदिर के मुख्य द्वार पर नंदी  व स्कन्दी भगवान शिव के दो द्वारपाल है | प्रवेश करने पर गजानन कि मूर्ति प्रथम पूजनीय है | यहाँ का शिवलिंग दो भागो में विभाजित है जिसके बड़े भाग मे शिव तथा छोटे भाग में  माँ पार्वती हैं | शिव पार्वती का यह अर्धनारीश्वर लिंगरूप संसार में अनूठा है |

यह दक्षिण मुखी  हनुमान मंदिर है दूसरा दर्शन इन्हीं का होता है |

 पुष्टिमाता मंदिर व देवदासवने पुष्टि इसे ८२ वां शक्तिपीठ मन गया हैं |

 भगवान  राम के पुत्र लव कुश का मंदिर |

 यह मंदिर केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के समान ही है |

 इसमें सभी नवग्रह स्थापित है |

 इसका दर्शन सभी मंदिरो के दर्शन के उपरांत करना चाहिए | यह खिचड़ी (चावल व मास) चढ़ाने का महत्व है | 

धन के मंत्री कुबेर जी का यह मंदिर है |

1.महामृतुंजय मंदिर

जागेश्वर मंदिर परिसर का सबसे प्राचीन व विशालतम मंदिर है  महामृतुंजय महादेव मंदिर |परिसर में प्रवेश करते ही आप इसे देख सकते हैं  

2.ज्योतिर्लिंग जागेश्वर

तदुपरांत प्रमुख मंदिर श्री ज्योतिर्लिंग जागेश्वर है जो विशालकाय पत्थरों से निर्मित है यहाँ के बाहरी  दीवारों पर अनेक देवी-देवताओं कि मूर्तियाँ उत्कीर्ण हैं जो बहुत ही आंनद प्रदान करती हैं | मंदिर के मुख्य द्वार पर नंदी  व स्कन्दी भगवान शिव के दो द्वारपाल है | प्रवेश करने पर गजानन कि मूर्ति प्रथम पूजनीय है | यहाँ का शिवलिंग दो भागो में विभाजित है जिसके बड़े भाग मे शिव तथा छोटे भाग में  माँ पार्वती हैं | शिव पार्वती का यह अर्धनारीश्वर लिंगरूप संसार में अनूठा है |

 3. हनुमान मंदिर=>

यह दक्षिण मुखी  हनुमान मंदिर है दूसरा दर्शन इन्हीं का होता है |

4.पुष्टिमाता

 पुष्टिमाता मंदिर व देवदासवने पुष्टि इसे ८२ वां शक्तिपीठ मन गया हैं |

5.लकुलीश मंदिर=>

 भगवान  राम के पुत्र लव कुश का मंदिर |

6.केदारनाथ मंदिर =>

 यह मंदिर केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के समान ही है |

7.नवग्रह मंदिर=>

 इसमें सभी नवग्रह स्थापित है |

8.बटुक भैरव मंदिर =>

 इसका दर्शन सभी मंदिरो के दर्शन के उपरांत करना चाहिए | यह खिचड़ी (चावल व मास) चढ़ाने का महत्व है | 

9.कुबेर मंदिर=>

धन के मंत्री कुबेर जी का यह मंदिर है |

 संग्राहलय =>

भारत सरकार के पुरातत्व विभाग द्वारा जागेश्वर धाम के नाम से एक संग्राहलय है | जिसमे मंदिर से जुडी प्राचीन मूर्तियाँ व वास्तु कला के नमूनों को रखा गया है | जिसमे प्रमुख अष्टधातु से निर्मित चंद्रवंशी राजा पवन देव की मूर्ति है | यह अन्य धातुओं से निर्मित अन्य मूर्तियाँ भी है |
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